जिंदगी मे ठहरा हुआ!
मिले आज उस वक़्त से जिसने बहुत कुछ सिखाया है!
चलो आज चल हे लेते है उसके पास!
मेरी शुरुआत तब हुई तब पहली दफा मेरी उस्से तक्रार हुई
वही से अपनी बातें चालू हुई
मिल्ना मिलना होता रहा तो कभी घर आना भी होता रहा!
मेने एक दिन उन्से पुछ ही डाला
क्या कोई और तो नही जो हमसे भी बड़कर तो नही
प्यारा सा जवाब मिला पर वो जो सुना मुझे गवारा था!
पर जानना भी बहुत जरुरी था की मुझे
उन्के दिल मे था क्या क्या वो चाहते थे हमे
या अब तक सिर्फ अजमा रहे थे हमे
जान कर इत्ना तो पाता चल ही गया
की गेर तो नही अब हम
जानतें है कुछ हद तक
इसलिये हमने स्वीकार किया अब मेने
जित्ना साथ दे सका देता गया
बस अब कुछ वक़्त दे दे मेरा!
जो तुझे सोच के ठहरा हुआ है!
चलो आज चल हे लेते है उसके पास!
मेरी शुरुआत तब हुई तब पहली दफा मेरी उस्से तक्रार हुई
वही से अपनी बातें चालू हुई
मिल्ना मिलना होता रहा तो कभी घर आना भी होता रहा!
मेने एक दिन उन्से पुछ ही डाला
क्या कोई और तो नही जो हमसे भी बड़कर तो नही
प्यारा सा जवाब मिला पर वो जो सुना मुझे गवारा था!
पर जानना भी बहुत जरुरी था की मुझे
उन्के दिल मे था क्या क्या वो चाहते थे हमे
या अब तक सिर्फ अजमा रहे थे हमे
जान कर इत्ना तो पाता चल ही गया
की गेर तो नही अब हम
जानतें है कुछ हद तक
इसलिये हमने स्वीकार किया अब मेने
जित्ना साथ दे सका देता गया
बस अब कुछ वक़्त दे दे मेरा!
जो तुझे सोच के ठहरा हुआ है!
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